Sunday, March 22, 2015

शर्मसार....


शर्मसार ...
जैसा की हम सभी जानते है की हालहि में बीबीसी द्वारा ‘निर्भया डाक्यूमेंट्री’ प्रकाशित की गई  है,इसी के चलते मैंने भी इस डाक्यूमेंट्री को देखा २ से ३ बार क्यूंकि मैं खुद ही अपने देश के लोगो की सोच पर संदेह और आश्चर्य हो रहा था .मैं ये तो नहीं कहूँगी की इस डाक्यूमेंट्री के माध्यम से हम देश की सोच को बदल सकते है ,पर इस प्रयास से हम लोगो की सोच के बारे में जरुर जान सकते है .एक लड़की जो सिर्फ २३ साल की थी जिसके पास एक उज्वल भविष्य था क्यूंकि वह एक मेडिकल की छात्र थी .वैसे तो वो अब ये सब पढने औए देखने के लिए नहीं है पर फिर भी एक सवाल अपने पीछे छोड़ गई ...की आखिर गलती थी क्या ??रात में ८;३० बजे बहार जाना ?या एक लड़के के साथ बहार जाना? या फिर एक लड़की होना ??इन सभी सवालो के बहुत लोगो ने अलग अलग जिनमे से कुछ बहुत ही शर्मनाक है जो की इस डाक्यूमेंट्री का हिस्सा भी है .केस के डिफेन्स लॉयर का कहना है की “फीमेल इस लाइक अ फ्लावर ,इफ फ्लावर इस इन  अ गटर इट विल स्पोइल्ट एंड इफ वी पुट फ्लावर इन अ टेम्पल इट विल worshipped” इसका तो यही तात्पर्य है की लडकियों को बस घर की चार दीवारों में रहना चाहिए अगर वो घर के बाहर निकली तो रेप होना बहुत ही ऑब्वियस है .ये है मेरे पढ़े लिखे समाज की सोच ..उधर ही आनन् फानन में वकील साहब ने ये बयान दे डाला की ‘वी हेव बेस्ट कल्चर एंड इन आवर कल्चर वी हेव नो प्लेस फॉर अ वुमन ’ इस स्टेटमेंट  न ही लडकियों पर बल्कि उनको अस्तित्व पर भी सवाल उठा डाला .आकड़ो की माने तो हमारे देश में हर २० मिनट  पर एक रेप होता है .उधर ही दूसरा पक्ष दोषी मुकेश का जो की २८ साल का है और पेशे से एक बस ड्राईवर है उसका तो ये कहना था की हम लोग बस उस लड़की और लड़के को सबक सिखाना चाहते थे .क्यूंकि अगर वो एक अच्छी लड़की होती तो रात के  ९ बजे अपने घर से बाहर न घूम रही होती और अगर उसने रेप के वक़्त अपने सेल्फ डिफेन्स में संघर्ष न करती तो सिर्फ रेप करने के बाद उसे जाने देते .इतना घिनौना काम करने के बाद भी वो अपनी ऐसी दलीले पेश कर रहा था और पछतावे का तो दूर –दूर तक कोई निशाँ नहीं था .मैंने सुना है की ये डाक्यूमेंट्री बैन कर दी गए है क्यूंकि ये देश की छवि को ख़राब कर रही थी .पर मेरा तो ये सोचना है की ये हमारे देश का सच है और सच अक्सर कड़वा होता है . जिम्मेदार कौन ??वो पढ़ा लिखा वर्ग जो बोल रहा है की लडकियों को ६ बजे के बाद बहार नहीं जाना चाहिए था या फिर वो शिक्षा या समाज से दूर है और उसका सोचना है की ‘girl should allow them to get raped’ ...
 व्हाट द डिफरेंस बिटवीन educated एंड uneducated सोसाइटी जहा वो एक ही निष्कर्ष निकाल रहे है की लडकियों को अपनी हदों में रहना चाहिए मेरा पूछना है की पुरुष वर्ग को उनकी हदे कौन बताएगा ??निष्कर्ष कुछ निकले या न निकले पहल तो होगी ही...सब कुछ सोच पर निर्भर करता है की आप कोई सीख लेते है या फिर से दुनिया के लिए सीख बनाना चाहते है .......
यहाँ पर सांस लेना भी मुश्किल है....
जहा हर पल एक खौफ है ....
आज किसी की ‘ज्योति ’थी ....
क्या पता कल ये गाथा भी हमारी हो ....

Tuesday, March 17, 2015

अगर तुम न होते .....


अगर तुम न होते ......
ये चाहते ,ये रौनके  न होती ...   
अगर तुम न होते ...
ज़िन्दगी तो थी पर जी न पाते ...
अगर तुम न होते ...
तुझे पाने की कोशिश तो न की  ,पर सब कुछ खो बैठते ...
अगर तुम न होते ...
जख्म तो आज भी है ,पर इन्हें भूल न पाते ...
अगर तुम न होते ...
दुनिया क लिए भले ही तू एक कतरा है ,पर मेरी तो दुनिया ही अधूरी होती ...
अगर तुम न होते ...
दुनिया ने दर्द तो बहुत दिया , पर कभी बयान न कर पाते ...                       
अगर तुम न होते ...
साथ निभाने का वादा तो बहुतो ने किया पर मुझे इल्म था वो साथ नहीं फरेब होता ...
अगर तुम न होते ...
ज़िन्दगी ने सब कुछ दिया पर किसी को खोने का डर न होता ...
अगर तुम न होते ..
तूने मेरे दर्द को समझा ,जों इस सीने में दफ़न था ...
नहीं तो जीत हार क इस खेल में दर्द जीत जाता अगर तुम न होते ...
अगर तुम न होते ...

एक विचार ऐसा भी ...

एक वचार ऐसा भी.....

ढलते हुए सूरज को कोई सलाम नहीं करता ,पर सुबह का इंतज़ार सबको होता है ...लोग भूल जाते है की ये सुबह भी वो ढलता हुआ सूरज ही लाएगा..तो कब किसका सूरज ढल जाए ??और कब सुबह की  तरह किसके  जीवन में रोशिनी आ जाए इसका पता किसको है ..आज यहाँ है कल कहीं और होंगे ये तो पता है पर क्या होंगे ये नि पता ...इसीलिए किसी की शोहरत के पीछे मत भागो भागना है तो अपने सपनो के पीछे भागो ...क्यूंकि वही सपना एक दिन शोहरत बनकर आपके कदमो में आ गिरेगी ....

तब ढलता हुआ सूरज सुबह बन जाएगा और गौर फरमाइयेगा तब निश्चित रूप से उस सुबह को  लोग सलाम करेंगे ....

पर ध्यान रखना वो सलाम इज्ज़त से होना चाहिए डर से नहीं ....क्यूंकि डर और इज्ज़त दोनों से शोहरत के माइने बदल जाएँगे ....