जब तू था तब कभी महसूस न हुआ की तेरे जाने से क्या होगा ??
तेरी शैतानी हम सब को सताती थी पर अब बस तेरी याद है .....
कभी सोचा न था कि ज़िन्दगी के किसी मुकाम पर बस तेरी तस्वीर रह जाएगी हाथों में ....
तेरे जाने का दर्द आज भी "माँ " की आँखों में दिखाई देता है .....
मुझे यकीन है की अब तू वापस कभी नहीं आएगा पर आज भी हर ' राखी ' पर तेरा इंतज़ार रहता है ....
अगर पता होता तेरा मेरा साथ बस इतना ही था तो कभी तुझे रुलाती ना .. कभी तुझे सताती ना....
बस एक ख्वाइश है मेरी तुझे एक बार देख लू तुझसे पूछ लूँही कि तू कैसा है ???
एक सवाल और मेरा.. तुझे कभी हमारी याद नहीं आती ??
शायद वो लोग तुझे ज्यादा प्यार करते होंगे ...
पर " माँ " आज भी तुझे उतना ही प्यार करती है जितना वो हमसे करती है या शायद उससे भी ज्यादा .....
तुझे जाना ही था तो तू आया ही क्यूँ ???
बहुत भावुक कविता,....
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