Tuesday, April 7, 2015

"कफ़न"



कफ़न ....
यु तो हम इस सच से वाकिफ़ है की ज़िन्दगी जिसको  हम ऊपर वाले की देन समझते है उसे एक दिन ख़तम ही हो जाना है . “कफ़न” भी इसी सच का एक हिस्सा है पर सच से हमेशा ही हम इंसान डरते आए है .वैसे अगर “कफ़न” पर ध्यान दिया जाए तो ये हमेशा ही श्वेत रंग का ही होता है ,जिसको हम शोक का भी प्रतीक मानते है .ये श्वेत रंग का कफ़न वैसे तो हमेशा दुःख का ही संकेत माना जाता है पर जरा सोचिये जो इंसान किसी लम्बी बिमारी से ग्रस्त उसके लिए तो शायद ख़ुशी का प्रतीक हो .
वही अगर किसी की आकाश्मिक मौत हो जाए तो उस “कफ़न” के साथ ही साथ उसके सारे सपने और उमीदे भी दफन हो जाती है ...वैसे दिखने में तो “कफ़न” बस एक श्वेत कपडे का टुकड़ा है पर अगर उसके अस्तित्व पर जाए तो “कफ़न” वो चीज़ है जो एक इंसान के अस्तित्व को हमेशा हमेशा के लिए ख़तम कर देता है .जब कोइ शरीर “कफ़न” में लिपट जाता है तब ये समझ लेना चाहिए की अब बस ये सफर यही पर ख़तम हुआ  और अब अगर कुछ बचा है तो वो सिर्फ और सिर्फ उस इंसान की यादें ...बड़ी ही अजीब सी बात है जब इंसान के अन्दर साँसे होती है तब तक वो दुनिया के सारे रंगों को अपनी ज़िन्दगी में भरने में लगा रहता है पर जैसे ही साँसे साथ छोड़ देती है उसी के साथ ही ये रंग भी दूर हो जाते है .वैसे श्वेत रंग शोक के साथ साथ शांति का भी प्रतीक होता है शायद इसीलिए सफ़ेद रंग को ही “कफ़न” के लिए चुना गया होगा क्यूंकि जब तक इंसान जीवित रहता है तब तक उसकी ज़िन्दगी में एक पल की भी शान्ति नहीं रहती है इसीलिए शायद ज़िन्दगी ख़तम होने है पर शांति की जरुरत और अहमियत दोनों ही बढ़ जाती है. “कफ़न का नाम सुनते ही लोग खौफ  में आ जाते है पर शायद वो ये नहीं  जानते है की ये जीवन का बहुत बड़ा सत्य है और  एक ना एक दिन  इस सच से उसे रूबरू होना ही पड़ेगा  देखा जाए तो “कफ़न” हर किसी की मौत का साक्षी होता है फिर भी हम सभी अपनी रोजाना की ज़िन्दगी में इसका  नाम लेने से भी डरते है ....
पर जब बात शहीदों की आती है हमारे देश के लिए शहीद हो जाते  है उनके लिए तो  “कफ़न” एक फक्र की बात होती है .उनके लिए देश का तिरंगा ही “कफ़न” होता और वो हस्ते हस्ते इस “कफ़न” को स्वीकार करते है .पूरी ज़िन्दगी लोग पैसे कमाने के पीछे अपनी ज़िन्दगी की खुशिया तक खो  बैठते है पर ये तो सोचते ही नहीं की “कफ़न” जिसमे हम सब को जाना है उसमे तो कोई ‘पॉकेट’ भी नहीं होती तो ये सारे पैसे ले कैसे जाएँगे ?? ये सारे वो सच है जो हम जानते तो है पर स्वीकार नहीं कर पाते  है ....
कुछ के सारे सपने ख़तम होते है इस कफ़न से और कुछ को ऐसी ज़िन्दगी से आज़ादी मिलती है जिसमे वो रहना ही नहीं चाहते है . “ कफ़न” काम तो एक ही करता है पर अलग -अलग लोगो के लिए इसके अलग- अलग मायने होते है .पर हा एक बात अपने ज़हन में हमेशा रखे एक न एक दिन इस “कफ़न” से मुलाकात हर किसी की होनी है .
ज़िन्दगी की कश्मो-कश ये भूल न जाना ...
ये “कफ़न” किसी का नहीं ...
आज मेरा है तो कल तेरा होगा ....

               

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