मेरी शिकायत मेरे देश से।
यू तो मैं ऐसे देश की लड़की हू जो " भारत माता " के नाम से भी सम्बोधित किया जाता है। पर वो कहते है ना "व्हाट इज़ दियर इन नेम" क्युकी हमारे देश में हर दिन , हर पल लगभग हर लड़की को ये एहसास दिलाया जाता है की वह एक लड़की है। हमारा ही एक ऐसा देश है जहा रेप विक्टिम को ऐसे देखा जाता है जैसे पता नई उसने कितना बड़ा गुनाह किया हो। सोचने वाली बात है कि दामिनी रेप केस जैसे जघन्य अपराध में भी लोग ऐसे सवाल उठाते है कि वो इतनी रात को अपने बॉयफ्रेंड के साथ क्या कर रही थी ?? मैं ऐसे देश में हु जहा " "वूमेन एम्पावरमेंट" पर सेमिनार तो होते है पर सोच कभी उस सेमिनार की चार दीवारो से बाहर नहीं आ पाती। क्या होगा देश की उन लड़कियों का जिनको उनके घर वाले ही कमजोर बना रहे है। अक्सर लोगो को कहते हुए सुना है "डोंट बिहेव लाइक एनिमल्स " पर मै तो ये कहती हु कि बिहेव लाइक एनिमल्स बिकॉज़ इवन दे आल्सो डोंट डिस्क्रिमिनेट ऑन द बेसिस ऑफ़ दियर जेंडर। जब भी कोई सेक्सुअल हरैसमेंट का केस सामने आता है तब लोगो को ड्रेसिंग सेंस के बारे में बात करते सुना है इसी बात पर एक बात मेरे ज़ेहन में आती है कि उस लड़की की क्या गलती होगी जो अभी 5 साल की भी नहीं हुई और रेप जैसे अपराध का शिकार हो गई। इससे यह सवाल सामने आता है की , उसकी भी क्या कोई ड्रेसिंग प्रॉब्लम थी ? जिसकी वजह से उसके साथ ऐसा हुआ ?? मेरी जैसी देश की हर लड़की की यही शिकायत होगी की वो कैसे सर्वाइव करे जहा हर वक़्त एक दर सा हमारे अंदर है की पता नई कल कौन सी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। वैसे एसिड अटैक का भी ट्रेंड देश में बहुत जोरो शोरो से है। एक सवाल लड़को से "की भाई लोगो क्या एसिड डालने से वो लड़की आपसे प्यार करने लगेगी " प्रपोसल एक्सेप्ट लेगी ?? जो की एक बहुत की कॉमन रीज़न है एसिड अटैक का क्यूंकि लड़को को रिजेक्शन मिलने क बाद अक्सर कहते हुए सुना है " की यार ईगो हर्ट हो गया है " मेरे भाइयो इतनी फ्रीडम तो दे दो की हम अपनी पसंद और नापसंद का फैसला हम खुद कर सके। कितने हादसे मेरे देश में लड़कियों के साथ हुए होंगे जो आज भी उनके जेहेन में दफ़न होंगे और कोई भी कोई ऐसी घटना सामने आती है तो उनको कहीं न कहीं अपनी कहानी नज़र आती होगी। कितनी शर्म की बात है की हम देश को बाहरी हमलो से तो बचा लेते है पर अपने ही देश की बेटियो को नहीं बचा पाते। गरीबी से ज्यादा बुरी हालत देश में लड़कियों की है हर एक दिन उनके लिए एक चुनौती की तरह है। यह सब देखने क बाद तो बस दिल से एक ही आवाज़ आती है की " न आना इस देश मेरी लाड़ो " और अगर आ गई तो " ज़िन्दगी हर कदम एक नयी जंग है " मेरा सलाम देश की हर उस बेटी को जो यहाँ रहती और कहती है " भारत माता की जय " और सवाल मेरे देश से की आज़ादी मिले तो ६८ साल हो गए पर देश की लड़कियों को आज भी आज़ादी नहीं मिली। देश की हर लड़की का बस अब एक ही सवाल है हमारी भी आज़ादी के बारे में पार्लियामेंट में कोई विचार विमर्श किया जाये।
" बेख़ौफ़ आज़ाद है जीना हमे "
बेख़ौफ़ आज़ाद है रहना हमे "
ये उस भारत की महिलाओं की स्तिथि है ,, जिस देश का नाम तो एक पुरुष के नाम पर पड़ा लेकिन फिर भी इसे हम भारत माता कहते हैं आज यहाँ जो भी हो रहा है बहुत ही दुखद है ॥ संवेदनशील मुद्दा ॥
ReplyDeleteइस देश मे एक पोर्न बनाने वाली को स्टार बना लिया जाता है । लेकिन रेप विक्टिम को समाज स्वीकार नहीं करता ।
ReplyDelete