Thursday, July 9, 2015

कुछ बनने की दौड़ में कितने अकेले रह गए हम ....



कुछ बनना है कुछ करना है ...इतनी आसानी से हम कह तो देते है शायद ही कभी किसी ने सोचा होगा की किसी मुकाम को हासिल केरते करते हम ऐसा बहुत कुछ पीछे छोड़ देते है जो शायद कभी हमारा साया हुआ करता था . ना चाहते हुए भी अपनी ज़िन्दगी में तौर तरीको के साथ साथ अपनी  ज़िन्दगी से लोगो को भी बदल डालते है.पर कभी कभी कुछ ऐसे लोगो का साथ भी मिल जाता है जो आपके जाने के बाद भी आपकी की कमी को महसूस करते है और कभी भूल से मिल जाने पर बस इतनी सी शिकायत करते है की ‘बहुत अकेले हो गए हम’ .हर किसी की ज़िन्दगी में कोई ऐसा साया जरूर होगा जिसको जाने अनजाने अपने नज़रअंदाज़ किया होगा और शायद कभी इस बात का इल्म भी न हुआ होगा आपको .ज़िन्दगी में आगे बढ़ो पर अपनों के साथ क्यूंकि हम एक दुसरे के साथ के बिना अधूरे है .....
# आप बीती #